द गर्ल ऑन द ट्रेन

के लीड किरदार वाली फिल्म ” को ओटीटी प्लैटफॉर्म नेटफ्लिक्स पर रिलीज कर दिया गया है। यह फिल्म इसी नाम से आए नॉवल पर बनी इंग्लिश फिल्म का हिंदी रीमेक है। जिन लोगों ने नॉवल पढ़ा है या इंग्लिश फिल्म देखी होगी, उन्हें इस सस्पेंस-थ्रिलर फिल्म की कहानी पहले से पता होगी।

कहानी: किसी समय एक बड़ी वकील रही मीरा (परिणीति चोपड़ा) अपने पति और बच्चे को खोने के दुख से गुजर रही है। परिवार टूटने के बाद मीरा का करियर भी धीरे-धीरे डूबने लगता है। एक कार ऐक्सिडेंट में वह ऐमनीसिया नाम की बीमारी का शिकार हो जाती है जिससे उसे खुद के साथ होने वाली घटनाएं याद नहीं रहती हैं। इसके बाद मीरा बेहद शराबी हो जाती है। इसके बाद मीरा की लाइफ में एक महिला आती है। वह उस महिला को रोजाना रेडब्रिज से ग्रीनविच जाने वाली ट्रेन में देखती है। मीरा उसके घर और उसकी लाइफ से बहुत प्रभावित हो जाती है। एक दिन इस महिला नुसरत जॉन (अदिति राव हैदरी) की जंगल में कोई हत्या कर देता है। जब पुलिस इसकी जांच करती है तो उसे हत्या की जगह पर मीरा के मौजूद होने के सबूत मिलते हैं। अब इस हत्या की अनसुलझी गुत्थी ही फिल्म की कहानी है।

रिव्यू: मीरा के रूप में परिणीति चोपड़ा का किरदार फिल्म में शुरू से ही स्ट्रॉन्ग रहता है। डायरेक्टर रिभू दासगुप्ता ने फिल्म के लीड किरदार को शुरुआत से ही फिल्म पर एक तरह से हावी कर दिया है। मीरा की जिंदगी में आते उतार-चढ़ाव को परिणीति चोपड़ा अपनी ऐक्टिंग के जरिए दिखाने में कामयाब रही हैं। मीरा के किरदार में आपको कई परतें देखने को मिलेंगी। मीरा एक परफेक्ट लाइफ के लिए नुसरत की तरफ देखती है लेकिन उसे नहीं पता कि दुनिया में परफेक्ट लाइफ जैसी कोई चीज ही नहीं होती है। नुसरत की लाइफ में भी अपनी परेशानियां हैं। फिल्म का पहला हाफ आपको खास आकर्षित नहीं करता है लेकिन सेकंड हाफ आपको थोड़ा रोमांचित कर सकता है।

इंग्लिश फिल्म में परिणीति वाला किरदार ऐमिली ब्लंट ने निभाया था जिसके लिए उन्हें काफी तारीफ मिली थी। जाहिर है ऐसा किरदार निभाने के लिए परिणीति के ऊपर काफी दबाव रहा होगा। लेकिन उन्होंने इस किरदार के साथ कहीं न कहीं न्याय कर दिया है। रिभू दासगुप्ता पहले भी साइकोलॉजिकल थ्रिलर जॉनर में ‘माइकल’ और ‘तीन’ जैसी फिल्में बना चुके हैं तो इस फिल्म को बनाने में उनका पुराना अनुभव भी काम आया होगा। अदिति राव हैदरी का किरदार बहुत छोटा है तो उनके पास ज्यादा करने के लिए कुछ खास नहीं था। पुलिस अधिकारी के तौर पर कीर्ति कुल्हारी का किरदार भी परिणीति चोपड़ा के मुख्य किरदार के नीचे दब जाता है। कुल मिलाकर एक उम्दा फिल्म का हिंदी रीमेक बनाना बड़ी जिम्मेदारी होती है, और फिल्म की टीम उसमें पूरी तरह तो नहीं लेकिन कहीं न कहीं कामयाब होती भी नजर आती है।

क्यों देखें: परिणीति चोपड़ा के फैन हैं और सस्पेंस-थ्रिलर फिल्में पसंद करते हैं तो देख सकते हैं।

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