स्ट्रगल के दौरान मां ने किया सपॉर्ट, मुश्किल समय में भेजती थीं पैसेः वरुण शर्मा

लंबे संघर्ष के बाद जाने-माने कॉमिक कलाकार वरुण शर्मा को जब ‘फुकरे’ मिली, तो उनके किरदार चूचा ने उनकी जिंदगी बदल दी। ‘छिछोरे’ में उनके चरित्र सेक्सा को भी काफी पसंद किया गया। इन दिनों वे चर्चा में हैं अपनी फिल्म ‘रूही’ से। उनसे एक विशेष मुलाकात।

आपकी फिल्म इस हफ्ते सिनेमा हॉल का मुंह देखनेवाली है? किस तरह की फीलिंग्स आ रही है?
-मुझे ट्रेलर के रिस्पॉन्स से बहुत पॉजिटिव फीलिंग आ रही है। जिस तरह से सिनेमाघरों में एहतियात बरते जा रहे हैं और लोग भी सावधानी रख रहे हैं, ऐसा मालूम हो रहा है कि यह अब हमारी जिंदगी का हिस्सा ही बन गया है। मुझे लगता है कि इकट्ठा बैठकर परिवार बहुत वक्त से हंसा नहीं है बाहर जाकर। मैं देश की उस जनता में शुमार हूं, जिनकी धड़कन सिनेमा और क्रिकेट है। मैं उम्मीद और प्रार्थना करता हूं कि लोग अपने प्रियजनों के साथ फिल्में देखने आएं और पिछले साल जो थिएटर जाने में गैप आया था उसे पूरा कर दें।

आपके कॉमिक रोल हीरो के सामानांतर रखे जाते है। इस जगह को बनाने में कितनी स्ट्रगल करनी पड़ी?
-मुझे लगता ही नहीं था कि मैं कभी कॉमिडी कर सकता हूं। ‘फुकरे’ से पहले जब मैं थिएटर करता था, तो अश्वत्थामा और अंधा युग जैसे हार्डकोर और इंटेंस नाटक किया करता था। कॉमिडी मैंने फुकरे के साथ करनी शुरू की। लोगों ने इन किरदारों को अपनाया और खूब प्यार भी दिया। मैं अर्ज करता हूं कि यह सिलसिला लंबे समय तक चलता रहे। जो 2 हीरो और 3 हीरो फिल्म का दौर वापस आया है, उससे मैं खुश हूं। अब कॉमिडी में अच्छी स्क्रिप्ट लिखी जाने लगी हैं। हालांकि शुरुआती दौर में काफी रिजेक्ट हुआ। एक बार मेन रोल का झांसा देकर जूनियर आर्टिस्ट का किरदार भी दिया गया। ऑडिशन कई होते थे और रिजेक्शन भी खूब। अगली बारी, अगली बारी सुन-सुनकर परेशान हो जाता था। उसके बाद घर चला जाता और मम्मी को फोन करते थे कि पैसे खत्म हो गए हैं, थोड़े पैसे भेज दो न। मम्मी कहीं कुछ हो नहीं रहा है, कुछ समझ नहीं आ रहा है, वापस आ जाऊं क्या? लेकिन मम्मी सपॉर्ट कर देती थीं।

कॉमिक इमेज होने के नाते आपसे हमेशा कॉमिडी की अपेक्षा की जाती, कभी आपको कोफ्त होती है?
-लोगों को अमूमन लगता है कि मैं बड़े परदे पर लोगों को हंसाता हूं, तो मेरा व्यक्तिगत स्वभाव भी ऐसा ही होगा। मगर ऐसा है नहीं है। इंसान होने के नाते हम भी अच्छे और बुरे वक्त से गुजरते हैं। आपके दिमाग में परिवार की, घर की, आर्थिक जैसी कई चीजें चल रही होती हैं। कई बार सुबह 5 बजे की फ्लाइट होती है और वॉशरूम में कोई फैन मुझसे कॉमिक एक्ट की उम्मीद कर रहा होता है। कभी आप बीमार होते हैं और आपसे पब्लिक प्लेस पर कहा जाता है कि एक डायलॉग सुनाएं, उस वक्त मैनेज करना मुश्किल होता है। लेकिन एक ऐक्टर होने के नाते जब हम सेट पर जाते हैं, तब बिल्कुल एक पायलट की तरह। प्लेन में पायलट के दरवाजे के बाहर लिखा होता है अपनी सारी परेशनियों को इस दरवाजे के बाहर छोड़ दें, क्योंकि पायलट पर 250 लोगों की जिम्मेदारी होती है। वैसे ही ऐक्टर होते हुए प्रड्यूसर की पैसों की जिम्मेदारी हम लोगों की मेहनत पर होती है। मैं भी अपने आपको उस जहाज का पायलट मानता हूं। मैं अपनी सारी परेशानियां पीछे छोड़कर आ जाता हूं। और जैसे ही टेक खत्म होता है तब दोबारा स्ट्रेस में आ जाता हूं (हंसते हुए)

राजकुमार राव, जाह्रवी कपूर, वरूण शर्मा की ‘रूही’ का ट्रेलर

आप कई ऐक्टर-ऐक्ट्रेसेज के साथ काम कर चुके हैं। आपके सबसे चहीते साथी कलाकार कौन हैं?
-सभी के साथ मेरा अलग अनुभव रहा है। भगवान की दया से फिल्म करने के बाद वह मेरी निजी जिंदगी में बड़े अजीज दोस्त बन गए हैं। जैसे वरुण धवन। हम अब बहुत करीबी दोस्त हैं। कृति सेनन और मैं अच्छे दोस्त बन चुके हैं। अब जाह्नवी (कपूर) और राज (राजकुमार राव) प्यारे फ्रेंड बन गए हैं। आप जब शूटिंग और प्रमोशंस के दौरान इतना समय किसी इंसान के साथ गुजारते हैं, तो लगाव हो जाता है। जब हम किसी फिल्म प्रॉजेक्ट पर 6 महीने साथ में रहते हैं, तो आप असली रूप में ही बाहर आता हैं। जब आप किसी इंसान को अच्छे से जान लेते हैं, तब आप अपने आप ही उसके करीबी हो जाते हैं।

सुशांत राजपूत जैसे साथी कलाकार के साथ आपने उनके जाने से पहले ही ‘छिछोरे’ की थी। क्या आपको कभी शूटिंग के वक्त सुशांत सिंह राजपूत का मिजाज बदला हुआ-सा महसूस हुआ था?
-नहीं बल्कि उस दौरान हम एक यूनिट नहीं परिवार की तरह काम करते थे। उस समय हमने बहुत मस्ती की थी। वह पूरा का पूरा प्रोसेस पहले तो हॉस्टल लाइफ और उसकी जर्नी। हमने आईआईटी हॉस्टल में पूरी फिल्म शूट की थी। हम सात लोग हमेशा हर वक्त इकट्ठा रहा करते थे। जैसे मस्ती-मजाक करना, बातें करना, खेलना कूदना। कभी ऐसा महसूस ही नहीं हुआ।

आपको नहीं लगता इस हादसे को एक अलग ही रुख दे दिया गया?
-ऐसा बहुत लगता है। चीजें देखने और पढ़ने में बहुत तकलीफदेह होती हैं। भगवान उसकी आत्मा को शांति दे। मैंने उस पूरे दौर में अपना फोन बंद कर दिया था। वह बहुत ही ज्यादा कठिन समय था। दिशा सालियन (सुशांत की पूर्व मैनेजर) मेरी बहुत करीब थी। वही मेरा काम संभालती थीं। मैं उस खबर और घटना से हक्का-बक्का रह गया था और उस समय चुपचाप ही रहा करता था, क्योंकि मेरे लिए कई सारी चीजें हैं, जिसे मैं बाहर नहीं निकालना चाहता और खुद ही सुलझाना चाहता हूं।

Roohi Public Review: जानिए दर्शकों को कैसी लगी जान्हवी, राजकुमारऔर वरुण शर्मा स्टारर फिल्म ‘रूही’

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